The Popatlal

सच्ची खबर देंगे पोपटलाल

NationalPolitics

पश्चिम बंगाल,जय श्री राम के विरोध में जय बांग्ला के लगे नारे, दूसरे चरण की 142 सीटे ज्यादा संवेदनशील

Spread the love

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और फाइनल चरण की 142 सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं। दूसरे फेज की सीटें ज्यादा संवेदनशील हैं। इस चरण में भवानीपुर सीट सबसे अधिक सुर्खियों में है, जहां पर टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी और बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी के बीच मुकाबला है। इसके चलते सियासी टेंशन बनी हुई है और वोटिंग के दौरान शुभेंदु अधिकारी और टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई।
भवानीपुर में बीजेपी प्रत्याशी शुभेंदु अधिकारी जब टीएमसी के मजबूत गढ़ वाले बूथ पर पहुंचे। इस दौरान बूथ के पास टीएमसी के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में जुटे हुए थे। शुभेंदु अधिकारी ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने लगे, जिसके जवाब में टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने ‘जय बांग्ला’ के नारे लगाने शुरू कर दिए। इसके चलते माहौल बहुत टेंशन भरा हो गया और शुभेंदु अधिकारी और टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच झड़क शुरू हो गई।
टीएमसी कार्यकर्ताओं के द्वारा ‘जय बांग्ला’ नारे लगाते देख शुभेंदु अधिकारी ने सुरक्षा बलों से जाकर शिकायत की कि ये लोग वोटर नहीं, बांग्लादेशी है। इसके बाद सुरक्षा बलों ने मोर्चा संभाल लिया और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हल्के बल प्रयोग करते हुए लाठी चार्ज किया। वहीं, बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि वो बूथ का दौरा कर रहे हैं। ये मतदाता नहीं बल्कि बाहरी लोग हैं, बांग्लादेशी हैं। मतदान करने पहुंचे एक मतदाता ने बताया कि बीजेपी प्रत्याशी शुभेंदु यहां दौरा करने पहुंचे थे। जहां उन्होंने जय श्रीराम का नारा लगाया। इसके जवाब में मौके पर मौजूद भीड़ ने ‘जय बांग्ला’ के नारे लगाना शुरू कर दिया। इसके बाद पूरे इलाके में हंगामा हो गया।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने जय श्री राम का नारा दिया है तो जवाब में टीएमसी ने जय बांग्ला का दांव चला है। बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने जय श्रीराम के नारे लगाए तो जवाब में टीएमसी कार्यकर्ताओं ने जय बांग्ला के नारे लगाने शुरू कर दिए. देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच विवाद हो गया, जो जल्द ही नोकझोंक और तनाव में बदल गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों को लाठी चार्ज करना पड़ा।
बंगाल की राजनीति में ‘जय श्रीराम’ बनाम ‘जय बांग्ला’ केवल धार्मिक या भाषाई नारे नहीं हैं, बल्कि यह दो अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं और अस्मिताओं की टक्कर का प्रतीक बन चुके हैं. जय श्रीराम को भाजपा बंगाल में अपनी उपस्थिति मजबूत करने और हिंदू ध्रुवीकरण के लिए इस्तेमाल कर रही है।
बीजेपी के जय श्रीराम के जवाब में ममता बनर्जी बंगाली अस्मिता कार्ड खेलते हुए ‘जय बांग्ला’ का नारा दिया है। यह नारा बंगाली राष्ट्रवाद और क्षेत्रीय गौरव का प्रतीक है। ममता बनर्जी ने भाजपा को “बाहरी” पार्टी साबित करने के लिए इस नारे का इस्तेमाल किया.’जय बांग्ला’ मूल रूप से 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम का नारा था। जिसे ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में पुनर्जीवित किया ताकि यह संदेश दिया जा सके कि बंगाल अपनी संस्कृति और भाषा से समझौता नहीं करेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *