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बलौदाबाजार हिंसा, अमित बघेल को सुप्रीम कोर्ट से जमानत

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रायपुर। बलौदाबाजार हिंसा मामले में जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रमुख अमित बघेल को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है। सर्वोच्च अदालत ने अमित बघेल के साथ सह-आरोपी अजय यादव और दिनेश वर्मा को भी सशर्त जमानत देने का आदेश दिया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद अमित बघेल की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देते हुए अमित बघेल पर एक अहम शर्त भी लगाई है। आदेश के मुताबिक, वह अगले तीन महीने तक रायपुर जिले की सीमा में प्रवेश नहीं कर सकेंगे और उन्हें इस अवधि के दौरान जिले से बाहर ही रहना होगा।
अमित बघेल के खिलाफ बलौदाबाजार हिंसा के अलावा रायपुर के वीआईपी चौक पर छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा से जुड़े विवाद और सिंधी समाज के आराध्य के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी सहित कई प्रकरण दर्ज हैं। इन मामलों में उन्हें अलग-अलग चरणों में न्यायालय से राहत मिली है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने जमानत का विरोध करते हुए दलील दी कि इस मामले के अन्य आरोपी लंबे समय से जेल में बंद हैं, जबकि अमित बघेल की हिरासत की अवधि अपेक्षाकृत कम रही है। सरकार ने इसी आधार पर हाईकोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने का हवाला भी दिया।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल हिरासत की अवधि किसी आरोपी को जमानत से वंचित करने का पर्याप्त आधार नहीं हो सकती। इसी टिप्पणी के साथ कोर्ट ने हाईकोर्ट का आदेश निरस्त कर दिया।
बचाव पक्ष ने अदालत में तर्क रखा कि अमित बघेल को हिंसा का मुख्य साजिशकर्ता बताया गया, लेकिन जांच के दौरान इस आरोप के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जा सके। अदालत ने यह भी माना कि मामले में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और जांच से जुड़े आवश्यक दस्तावेज रिकॉर्ड पर उपलब्ध हैं। ऐसे में आरोपी को अनिश्चितकाल तक जेल में रखना उचित नहीं है। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने तीनों आरोपियों को जमानत प्रदान कर दी।

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