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थ्रीडी फैक्टरी में ब्लास्ट, 3 मजदूरों की मौत, कई घायल

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रायपुर। राजधानी के उरला थाना क्षेत्र के बेंद्री की फैक्ट्री में मंगलवार को भीषण ब्लास्ट हुआ। इस विस्फोट में तीन मजदूरों की मौत हो गई। उरला थाने क्षेत्र के बेंद्री की थ्रीडी फैक्ट्ररी में बीते दिनों भीषण ब्लास्ट होने से तीन मजदूरों की मौत हो गई। वहीं कई लोग घायल हैं, जिन्हें इलाज के लिये रायपुर के मेकाहारा अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मरने वालों में लाल सिंह, अरुण पांडे 19 और कमल सिंह 25 आदि शामिल हैं।
हादसे के बाद कारखाना परिसर में अफरा-तफरी मची रही। लोग जान बचाने के लिये इधर-उधर भागते दिखे। इसकी
सूचना पर उरला थाना पुलिस मौके पर पहुंची। राहत और बचाव कार्य में जुटी रही। हादसे के बाद कारखाना परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। डीसीपी, एडीसीपी नार्थ और एसीपी समेत पुलिस के आला अधिकारी मौके पर मौजूद हैं। फायर बिग्रेड और एसडीआरएफ की टीम भी राहत और बचाव कार्य में लगी रही। बताया जाता है कि ऑक्सीजन सिलेंडर फटने से विस्फोट हुआ। पुलिस मामले की जांच कर रही है। हादसे के बाद कारखाना प्रबंधन के कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं थे। इस वजह से स्थानीय लोगों और कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। लोगों ने प्रशासन से मामले की जांच करने की मांग की है।
पुलिस के मुताबिक, हादसे में मजदूर लाल सिंह और अरुण पांडे की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि घायल मजदूर कमल सिंह ने अस्पताल ले आते वक्त रास्ते में ही दम तोड़ दिया। मृतक कमल सिंह और लाल सिंह मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले के रहने वाले थे। वहीं तीसरा व्यक्ति अरुण पांडे प्रदेश के जांजगीर चांपा जिले के निवासी था।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ब्लास्ट इतना भीषण था कि बॉडी पार्ट 200 मीटर दूर तक बिखरे रहे। कई जगह बिखरे पड़े शरीर के अंगों में चीटियां लगी हुई दिखाई दी। विस्फोट इतना जबरदस्त था कि बहुत दूर तक उसकी आवाज सुनाई दी। सूचना पर पुलिस और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची बचाव और राहत कार्य जारी है पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है।
इस सम्बन्ध में नॉर्थ जोन डीसीपी मयंक गुर्जर ने बताया कि ब्लास्ट फर्नेस डिपार्टमेंट में ऑक्सीजन सिलेंडर में जोरदार विस्फोट हुआ। इस वजह से आस-पास काम कर रहे मजदूर भी इसकी चपेट में आ गए। परिजनों का आरोप है कि फैक्ट्ररी में सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक इंतजाम नहीं थे। लापरवही बरती जा रही थी। इस कारण यह हादसा हुआ है। फैक्ट्ररी प्रबंधन लीपापोती करने में लगा हुआ है। इस फैक्ट्री में कच्चा लोहा बनाने का काम किया जाता है और उससे गाड़ियों के कलपुर्जे बनाए जाते हैं।

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