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महासमुंद में 17 करोड़ का धान घोटाला, 15 समितियों पर एफआईआर

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महासमुंद। जिले में 17.93 करोड़ का कथित धान घोटाला सामने आया है। इस मामले ने प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में कई खरीदी केंद्रों के रिकॉर्ड में धान का स्टॉक दर्ज था। हालांकि, भौतिक सत्यापन के दौरान वहां स्टॉक नहीं मिला।
वर्ष 2025-26 के धान खरीदी सत्र में 182 खरीदी केंद्रों से 1,01,95,681.20 मीट्रिक टन धान खरीदा गया था। मिलिंग के बाद रिकॉर्ड के अनुसार 57,860.47 कुंतल धान शेष होना चाहिए था। लेकिन, जांच के दौरान 54 केंद्रों पर यह स्टॉक नहीं मिला। गायब धान का मूल्य करीब 17 करोड़ 93 लाख 67 हजार 457 रुपये आंका गया है। यह समर्थन मूल्य 3,100 रुपये प्रति कुंतल के आधार पर है।
आरंगी और बम्हनी सहकारी समितियों में सबसे अधिक धान गायब मिला। इन दोनों केंद्रों से चार-चार हजार कुंतल से अधिक धान गायब पाया गया। तोषगांव, बघरपाली, मोगरापाली, समहर, कोटद्वारी, मल्यामाल, बेलसोंडा और खेमड़ा सहकारी समितियों में भी बड़ी मात्रा में धान की कमी सामने आई है। इससे लाखों रुपये के नुकसान का अनुमान है। धान खरीदी की निगरानी के लिए नोडल और मॉनिटरिंग अधिकारी नियुक्त होते हैं। इसके बावजूद बड़ी मात्रा में स्टॉक नहीं मिलने से निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठे हैं।
जिला विपणन अधिकारी ने करोड़ों रुपये मूल्य का धान स्टॉक में नहीं मिलने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि अब तक 15 सहकारी समितियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। मामले की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी गई है। 54 खरीदी केंद्रों पर धान का स्टॉक नहीं मिलने के बावजूद केवल 15 समितियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई है। शेष 39 केंद्रों के संबंध में आगे की कार्रवाई पर प्रशासन ने कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी है।

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