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Chhattisgarh

राजीवलोचन दर्शन से लोग करेंगे नववर्ष की शुरुआत,सातवीं से लेकर चौदहवीं शताब्दी तक के अनेक प्राचीन काली मंदिर मौजूद

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“संतोष सोनकर की रिपोर्ट”

राजिम । नववर्ष 2022 की शुरुआत इस बार दिन शनिवार को हो रही है। पौस मास कृष्ण पक्ष के चतुर्दशी को नववर्ष लगने से लोगों में विशेष रूप से उत्साह एवं उमंग है तथा इन्हें सेलिब्रेट करने के लिए खास तौर से धार्मिक स्थलों के अलावा वाटरफॉल एवं प्राकृतिक स्थलो में जाकर बिताना चाहते हैं कई लोग इस दिन को धर्म-कर्म में व्यतीत करने के लिए अपने घरों में कथा पूजा का भी कार्यक्रम करते हैं। कहीं-कहीं पर सांस्कृतिक कार्यक्रम तो कुछ जगहों पर कवि सम्मेलन जैसे हास्य धमाका होते हैं। इस बार छत्तीसगढ़ के प्रयाग भूमि राजिम में लोग आकर बिताना चाहते हैं इस संबंध में हमने कुछ लोगों से बात की तो उनका कहना था कि नववर्ष को हरि और हर की भूमि भगवान राजीवलोचन धाम में बिताना चाहते हैं परिवार सहित जाकर मंदिरों में देव दर्शन करेंगे तथा प्रसाद खाकर नववर्ष का आनंद उठाएंगे। बताना जरूरी है कि पिछले 2 सालों से कोरोना के कहर ने लोगों की दिनचर्या ही बदल कर रख दी है इस बार भी कोरोना का स्तर गया नहीं है। परंतु जिले में जानकारी के मुताबिक एक भी केस नहीं होने से लोग स्वतंत्र रूप से घूम कर शनिवार के दिन को बिताएंगे। उल्लेखनीय है कि कमलक्षेत्र पदमापुरी राजिम का वर्णन धार्मिक ग्रंथों में मिलता है इसे भगवान विष्णु एवं महादेव का धरा माना जाता है। बताया जाता है कि सतयुग में राजा रत्नाकर हुए उन्होंने यज्ञ किया और उससे प्रसन्न होकर भगवान विष्णु राजीवलोचन के रूप में प्रगट हुए। तब से लेकर चतुर्भुज रूप में विराजमान हैं। विशाल चतुर्भुजाकार मंदिर बनाया गया है जो दूर से ही स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। मंदिर के महामंडप में शिलालेख उत्कीर्ण है। जिससे छत्तीसगढ़ में कलचुरियों के शासन की जानकारी मिलती है। प्रवेश द्वार से लेकर गर्भगृह के चौखट तक मूर्तिकला एवं उत्कृष्ट कला नक्काशी का कई उदाहरण प्रस्तुत किया गया है जो देखते ही बनती है। मंदिर के चारों कोण में वाराह अवतार, वामन अवतार, नृसिंह अवतार एवं बद्रीनारायण अवतार का मंदिर है इनके दर्शन करने से चारों धाम का दर्शन एक ही स्थल पर हो जाता है। राजीव लोचन मंदिर के द्वार पर पूर्वाभिमुख साक्षी गोपाल का मंदिर है। इनके अलावा महाप्रभु जगन्नाथ, राज राजेश्वरनाथ महादेव, दान दानेश्वर नाथ महादेव, राजिम भक्तिन मंदिर, सूर्यदेव मंदिर, शनि देव, लक्ष्मी नारायण मंदिर, तट पर स्थित भूतेश्वर नाथ महादेव मंदिर, मामा भांचा मंदिर, सोंढूर, पैरी एवं महानदी त्रिवेणी संगम पर स्थित विश्व का विलक्षण एवं अनोखा पंचमुखी कुलेश्वर नाथ महादेव का मंदिर स्थित है। कहा जाता है कि इस शिवलिंग का निर्माण त्रेता युग में जगत जननी माता सीता ने अपने हाथ से बालू के द्वारा बनाया था वैसे भी रामायण काल में तीन नायक हुए जिनमें राम, लक्ष्मण एवं सीता प्रमुख है। राम ने रामेश्वर में रामेश्वरम महादेव की स्थापना किया। लक्ष्मण ने खरौद में लक्ष्मणेश्वरनाथ महादेव विराजमान किया था परंतु शक्ति स्वरूपा देवी सीता ने राजिम संगम में कुलेश्वरनाथ महादेव की स्थापना की थी। समय अंतराल के बाद यहां भव्य मंदिर का निर्माण किया गया जो विकराल बाढ़ आने के बावजूद अपने स्थान पर अडिग है। संगम के कारण माघ पूर्णिमा से लेकर महाशिवरात्रि तक 15 दिनों के लिए प्रदेश का विशाल मेला लगता है जिसमें देश विदेश के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित होते हैं इनके अलावा यहां एक सोनतीर्थ घाट है जिसमें स्नान करने से सोना दान करने के बराबर पुण्य मिलने की बात कही जाती है। यहां के अटल घाट, संगम घाट, गंगा आरती घाट, नेहरू घाट, बेलाही घाट, सोन तीर्थ घाट में स्नान करने का अपना अलग महत्व है। इसके अलावा रानी श्याम कुमारी देवी धर्मशाला के दक्षिण दिशा में बाबा गरीब नाथ मंदिर, पवन दीवान आश्रम में सोमेश्वर नाथ महादेव का मंदिर, गरियाबंद रोड में दत्तात्रेय भगवान का प्राचीन मंदिर तथा देवी मंदिरों में आदिशक्ति मां महामाया के मंदिर, चंडी मंदिर, सत्ती मंदिर दर्शनीय है। बताया जाता है कि प्राचीन कालीन सातवीं से लेकर चौदहवीं शताब्दी के मध्य बनाए गए चौरासी मंदिर यहां मौजूद है। पर्यटक सुबह से लेकर शाम तक मंदिरों को घूम सकते हैं। यहां के दर्शनीय स्थलों में संगम का विहंगम दृश्य, सीताबाड़ी की खुदाई से निकले प्राचीन अवशेष आदि अनेक जगहों पर जाकर पर्यटन किया जा सकता है यात्री दिन भर का टूर बना कर राजिम घूम सकते हैं। इसके अलावा यहां के देवी मंदिर जिनमें राजिम से ही 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित जतमई धाम जंगल व पहाड़ों के बीच में स्थित है। देवी घटारानी, मुरमुरा के पास स्थित झरझरा देवी, राजिम से पूर्व दिशा में स्थित फिंगेश्वर से लगा हुआ सोरिद खुर्द के जंगलों में स्थित रमई पाठ धाम, बारूका के पास चिंगरापगार वाटरफॉल, जिला मुख्यालय गरियाबंद से 8 किलोमीटर की दूरी स्थित विश्व का विशालतम भूतेश्वर नाथ महादेव का शिवलिंग के अलावा पंचकोशी शिव पीठ जिनमें फणीकेश्वर नाथ महादेव, कर्पूरेश्वर नाथ महादेव, ब्रह्मकेश्वरनाथ महादेव, चंपककेश्वर नाथ महादेव, पटेश्वरनाथ महादेव अनेक पर्यटन क्षेत्र है जहां पर जाकर नववर्ष को सेलिब्रेट किया जा सकता है। शहर में ही मंदिर से लगा हुआ छोटी गार्डन है जिसमें परिवार सहित बैठकर भोजन का आनंद लिया जा सकता है। कुलेश्वर नाथ महादेव मंदिर से तकरीबन 400 गज की दूरी पर लोमस ऋषि का आश्रम है। यहां बैठकर फैमिली फूड खुशियों में चार चांद लगाएंगे। मंदिर से ही लगा हुआ नवागांव एनीकट में लबालब पानी भरा हुआ है यहां वोटिंग का लुफ्त उठाया जा सकता था लेकिन प्रदेश शासन ने यह सुविधा अभी तक नहीं दी है लोग मांग भी कर रहे हैं कि यहां शीघ्र वोटिंग चालू किया जाए ताकि पर्यटक इसमें अपना समय गुजार सकें। वैसे भी अब राजिम मांघी पुन्नी मेला इसी के किनारे इस वर्ष से लगने का अंदेशा किया जा रहा है। देव दर्शन के साथ ही प्राकृतिक नजारा स्पष्ट रूप से देखने को मिलता है। नववर्ष के मद्देनजर लोगों की सुरक्षा के लिए हर वर्ष की तरह इस बार भी पुलिस व्यवस्था रहेगी ताकि लोगों को किसी प्रकार से कोई दिक्कत ना हो।

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