The Popatlal

सच्ची खबर देंगे पोपटलाल

Chhattisgarh

बोधघाट परियोजना का नया सर्वे तय करेगा दिशा

Spread the love

जगदलपुर। दंतेवाड़ा जिले के बारसुर के पास इंद्रावती नदी पर प्रस्तावित बोधघाट बहुउद्देशीय परियोजना को छत्तीसगढ़सरकार पुनर्जीवित करने के फैसले के बाद दिल्ली की वेपकोस लिमिटेड ने एक बार फिर सर्वे शुरू कर दिया है। यह परियोजना विगत 45 वर्षों से विकास की फाइलों और विस्थापन के डर के बीच अटकी हुई है, लेकिन अब इसे बस्तर की नई लाइफ लाइन बनाने की तैयारी में है। बोधघाट प्रोजेक्ट का इतिहास जितना पुराना है, इसकी लागत का ग्राफ भी उतनी ही तेजी से बढ़ा है। 1979 में जब योजना पहली बार आई, तब इसका स्वरूप और बजट आज के मुकाबले बेहद कम था। लेकिन समय के साथ तकनीकी बदलावों और महंगाई के कारण इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत अब 49 हजार करोड़ रुपए के पार जा चुकी है। वर्तमान में वेपकोस लिमिटेड की ओर से किया जा रहा नया सर्वे इस परियोजनाकी दिशा तय करेगा।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार अगले तीन महीनों के भीतर सर्वे का काम पूरा कर लिया जाएगा। इसी आधार पर डीपीआर मतलब नई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार होगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय स्वयं इस परियोजनाकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं। इससे साफ है कि सरकार इस बार इसे निर्णायक मोड़ तक ले जाने के मूड में है। वेपकोस लिमिटेड द्वारा तेजी से सर्वे कार्य जारी है। इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर विस्थापन एवं पुनर्वास नीति पर काम होगा। हालांकि, 45 साल बाद भी प्रशासन की मूल चुनौतियां वही हैं जिसके कारण प्रस्तावित बोधघाटपरियोजना अटकी हुई थी।
गौरतलब है कि 1979 में मध्यप्रदेश के दौर में केंद्र सरकार ने इंद्रावती नदी पर बोधघाट प्रोजेक्ट मंजूर किया गया था, तब इसका उद्देश्य 500 मेगावाट बिजली उत्पादन का था। वर्ष 2020 के आस-पास इसे पुनर्जीवित करने की कोशिशें शुरू हुईं। अब इसका स्वरूप बिजली उत्पादन से बदलकर बहुउद्देशीय कर दिया है, वर्तमान में इसकी लागत लगभग 49 हजार करोड़ रुपए हो गई है। इससे दंतेवाड़ा के अकेले 100 से ज्यादा गांव इस सिंचाई नेटवर्क से सीधे तौर पर जुड़ जायेंगे। दंतेवाड़ा बीजापुर और सुकमा के 269 गांवों के किसानों को साल भर पानी मिलेगा। जल संसाधन विभाग के मुताबिक बस्तर, दंतेवाड़ा और बीजापुर में कुल 9 परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। बोधघाट परियोजना का काम पूरा होने के बाद बाकी के लिए रास्ता खुल जायेगा। प्रस्तावित परियोजनाओं में बस्तर जिले में मटनार और चित्रकोट जलविद्युत परियोजना, दंतेवाड़ा में बोधघाट बहुउद्देशीय परियोजना, बीजापुर जिले में कुटरू, नुगूर और भोपालपटनम में जलविद्युत परियोजना और बहुउद्देशीय परियोजना शामिल हैं।
उल्लेखनिय है कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बधेल ने भी इंद्रावती नदी पर प्रस्तावित बोधघाट बहुउद्देशीय परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए प्रस्तावित बोधघाट परियोजना के सर्वेक्षण को लेकरसैद्धांतिक सहमति दे दी थी। साथ ही कई दूसरी महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं के सर्वेक्षण और विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के लिए भी तत्कालीन मुख्यमंत्री बघेल ने सैद्धांतिक सहमतिदी थी। श्री बघेल ने अपने निवास कार्यालय में जल संसाधन विभाग के कामकाज की समीक्षा के दौरान यह सहमति दी थी। इतना ही नही सर्वे और डीपीआर के लिए सरकार ने बजट में 50 करोड़ रुपए भी मंजूर कर दिए गये थे।
नक्सलियों एवं अन्य संगठनों के विरोध करने पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बधेल ने कहा था कि विरोध करने वाले नेता बताएं कि उनके खेतों में पानी पहुंचता है कि नहीं। उनके खेत में पानी पहुंच रहा है तो आदिवासी के खेत में पानी पहुंचना चाहिए की नहीं पहुंचना चाहिए। जो नक्सली इसका विरोध कर रहे हैं, उन नक्सली नेताओं को बताना चाहिए कि हैदराबाद में, तेलंगाना में महाराष्ट्र में वे जहां भी रहते हैं उनके खेतों और घरों की स्थिति क्या है। मुख्यमंत्री ने कहा, उन नक्सली नेताओं से भी मैं सवाल करना चाहता हूं, कि उनकी स्थिति क्या है। क्या आदिवासी की स्थिति नहीं सुधरनी चाहिए। उनके खेतों में पानी नहीं पहुंचना चाहिए। उनको रोजगार का अवसर नहीं मिलना चाहिए।इसके बाद चुनाव नजदीक आ जाओ पर तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बधेल जनसंपर्क अभियान भेंट मुलाकात पर निकल पड़े और उनका रूख बदल गया और उन्होने कहा है कि जब तक बस्तर के लोग सहमत नहीं होंगे, इंद्रावती नदी में प्रस्तावित बोधघाट परियोजना प्रारंभ नहीं की जाएगी। अब जब प्रस्तावित बोधघाट बहुउद्देशीय परियोजना को भाजपा की छत्तीसगढ़ सरकार पुनर्जीवित करने के फैसले के साथ आओ बढ़ रही है तब कांग्रेस का क्या रूख होता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *