रेती मंडी ब्रिज में तकनीकी चूक, डिजाइन बदलने के बाद बढ़ा निर्माण कार्य
मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान की टीम द्वारा इंदौर के रेती मंडी ब्रिज में कथित तकनीकी खामी पकड़े जाने का मामला गंभीर चिंता का विषय बन गया है। रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिज के टर्निंग पॉइंट पर सड़क की चौड़ाई केवल 7.50 मीटर रखी गई थी, जिसे विशेषज्ञों ने भारी ट्रैफिक और बड़े वाहनों की आवाजाही के लिए असुरक्षित माना। बाद में इस डिजाइन में बदलाव करते हुए चौड़ाई 10 मीटर करने और अतिरिक्त सपोर्ट के लिए दो नए पिलर जोड़ने का निर्णय लिया गया। यह स्थिति इस बात की ओर इशारा करती है कि प्रारंभिक योजना और तकनीकी परीक्षण में कहीं न कहीं बड़ी चूक हुई। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद निर्माणाधीन परियोजना में इस तरह के बदलाव न केवल सरकारी धन की बर्बादी दर्शाते हैं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करते हैं। इंदौर और भोपाल में हाल के वर्षों में ब्रिज डिजाइनों को लेकर उठे विवादों के बीच यह मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते यह खामी सामने नहीं आती, तो भविष्य में यहां बड़ा हादसा हो सकता था। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और इंजीनियरों पर कोई ठोस कार्रवाई होती है या नहीं।

