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सूरजपुर युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष नरेन्द्र के भ्रष्टाचार का भंडाफोड़

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सूरजपुर। युवाओं और विकास की बड़ी-बड़ी बातें करने वाली कांग्रेस पार्टी के नेताओं की असलियत एक बार फिर उजागर हो गई है। सूरजपुर में युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष एवं वर्तमान जिला पंचायत सदस्य नरेन्द्र यादव के भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ हुआ है। सूचना के अधिकार से प्राप्त आधिकारिक दस्तावेजों ने यह साबित कर दिया है कि पंचायत निधि में किस तरह से खुली लूट मची हुई है।
नरेंद्र यादव पहले जनपद सदस्य थे उस दौरान ग्राम पंचायत कमलपुर (जनपद पंचायत सूरजपुर) में वर्ष 2024-25 के दौरान हुए निर्माण कार्यों में युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष नरेंद्र यादव द्वारा शासकीय राशि का जिस प्रकार से भारी गबन किया गया है, वह सीधे तौर पर मेहनतकश जनता के साथ धोखा है।
आरटीआई से हुए खुलासे में यह स्पष्ट हो गया है कि असली काम करने वाले का हक मारकर, फर्जी लोगों के खातों में पैसा डाला गया है:
68 वर्षीय बुजुर्ग श्री राजकुमार दुबे के पुत्र की मशीन (श्योर स्माईल) ने ग्राम पंचायत कमलपुर में वास्तव में बोरिंग का काम किया था। उनका 64,000 रुपये का भुगतान आज तक नहीं किया गया। बुजुर्ग आवेदक को महीनों तक झूठा आश्वासन देकर घुमाया गया। असली काम करने वाले का पैसा रोककर, युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने फर्जीवाड़ा करते हुए ‘हीरामन बढ़ईÓ के नाम पर लाखों रुपये के बिल पास करा लिए। सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि जिस व्यक्ति के खाते में बोरिंग का पैसा डाला गया है, उसके पास बोरिंग की कोई मशीन ही नहीं है! भ्रष्टाचार और अंधेरगर्दी की हद तो तब पार हो गई जब कमलपुर निवासी अखिलेश के घर के पास हुए हैंडपंप खनन का 54,000 रुपये का फर्जी बिल श्री श्याम प्रिंटर के नाम पर लगाकर शासकीय राशि निकाल ली गई। भ्रष्टाचार के इस मॉडल में कागजों पर एक प्रिंटर की दुकान से बोरिंग करवा दी गई!
क्या यही है कांग्रेस का न्याय?
एक तरफ कांग्रेस पार्टी मंचों से न्याय की गुहार लगाती है, और दूसरी तरफ उनके अपने युवा जिलाध्यक्ष एक 68 वर्षीय बुजुर्ग की मेहनत की कमाई डकार जाते हैं। विकास कार्यों के नाम पर पंचायत निधि को अपनी निजी जागीर समझने वाले ऐसे नेताओं ने साबित कर दिया है कि कांग्रेस का हाथ, केवल भ्रष्टाचार के साथ है। पानी जैसी मूलभूत सुविधा के फंड को भी नहीं बख्शा गया।
कठोर कार्रवाई की मांग
इस पूरे प्रकरण की शिकायत राजकुमार दुबे ने प्रशासन से करते हुए इस पूरे प्रकरण में प्रस्तुत आरटीआई दस्तावेजों और पावती के आधार पर युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष नरेन्द्र यादव के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए। जनपद निधि से हुए इस घोटाले की उच्च स्तरीय जांच हो और फर्जी बिल लगाकर गबन की गई शासकीय राशि की तत्काल रिकवरी की जाए। पीडि़त बुजुर्ग राजकुमार दुबे को उनके द्वारा किए गए वास्तविक कार्य का बकाया भुगतान तुरंत दिलाया जाए।
कांग्रेस का प्रदेश नेतृत्व अब जवाब दे कि क्या वे ऐसे भ्रष्ट जिलाध्यक्ष को पार्टी से निष्कासित करेंगे, या फिर भ्रष्टाचार के इस मॉडल को अपना मूक समर्थन देते रहेंगे? जनता सब देख रही है और आने वाले समय में कांग्रेस के इस फर्जी विकास का करारा जवाब देगी।

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