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राजनीतिक दांव-पेंच के लिहाज से अहम मनेंद्रगढ़ में डीएफओ का तबादला चर्चा में

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मनेंद्रगढ़। राजनीतिक दांव-पेंच के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जाने वाले मनेंद्रगढ़ वनमंडल में महज छह महीने के कार्यकाल के बाद एक युवा डीएफओ का तबादला इन दिनों विभागीय और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। चर्चा है कि स्पष्ट कार्यशैली और नियमों के अनुरूप बिना किसी दबाव के काम करने वाले अधिकारी द्वारा नेताओं के विभिन्न गुटों को अपेक्षित तवज्जो नहीं दिया जाना भी उनके तबादले की वजहों में शामिल माना जा रहा है।

बताया जा रहा है कि अधिकारी ने मनेंद्रगढ़ में पदभार संभालने के बाद वन विभाग के कामकाज में स्पष्टता और पारदर्शिता को प्राथमिकता दी। निर्णय लेते समय किसी विशेष व्यक्ति, समूह या राजनीतिक प्रभाव के बजाय विभागीय नियमों और प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार काम करने की उनकी शैली चर्चा में रही।

मनेंद्रगढ़ क्षेत्र राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में यहां वन विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली का प्रभाव केवल विभागीय स्तर तक सीमित नहीं रहता। स्थानीय स्तर पर विभिन्न राजनीतिक गुटों और प्रभावशाली लोगों की सक्रियता के बीच अधिकारियों के लिए संतुलन बनाकर काम करना भी बड़ी चुनौती होती है। इसी पृष्ठभूमि में युवा डीएफओ का छह महीने के भीतर तबादला कई सवाल खड़े कर रहा है।

छह महीने में तबादला क्यों चर्चा में?

वन विभाग में डीएफओ का पद महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों वाला होता है। वन संरक्षण, अवैध कटाई और तस्करी पर नियंत्रण, वन क्षेत्र का प्रबंधन तथा विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां डीएफओ के स्तर पर होती हैं। ऐसे में किसी अधिकारी को कामकाज की पूरी दिशा तय करने और उसके परिणाम सामने लाने के लिए पर्याप्त समय मिलना जरूरी माना जाता है। बताया जा रहा है कि संबंधित अधिकारी ने अपने कार्यकाल में कई मामलों में नियमों को प्राथमिकता दी और किसी भी प्रकार के दबाव में आए बिना निर्णय लेने की कोशिश की। यही कार्यशैली अब उनके छह महीने के भीतर हुए तबादले को चर्चा का विषय बना रही है।

क्या राजनीतिक समीकरण बना वजह?

विभागीय हलकों में सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात को लेकर है कि क्या अधिकारी की स्वतंत्र कार्यशैली और राजनीतिक गुटों से दूरी उनके तबादले की एक वजह बनी। हालांकि, इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान या दस्तावेज सामने नहीं आया है। इसलिए इसे फिलहाल केवल विभागीय और राजनीतिक हलकों में चल रही चर्चाओं के रूप में ही देखा जा रहा है।

तबादला सूची ने बढ़ाई चर्चाएं

हाल ही में जारी तबादला सूची में मनेंद्रगढ़ के युवा डीएफओ का नाम शामिल होने के बाद यह चर्चा और तेज हो गई। छह महीने की छोटी अवधि में स्थानांतरण होने के कारण विभागीय कामकाज की निरंतरता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नए अधिकारी के आने के बाद मनेंद्रगढ़ वनमंडल में विभागीय कामकाज और निर्णय लेने की शैली में क्या बदलाव आता है।

इस सूची में युवा और कर्मठ आईएफएस अधिकारियों को फील्ड से हटाकर मुख्यालय और वन विकास निगम जैसी महत्वपूर्ण जगहों पर भेजा गया है। जबकि जमीनी स्तर पर वन विभाग को नए जोश, स्पष्ट कार्यशैली और ईमानदारी के साथ काम करने वाले अधिकारियों की जरूरत है। गौर करने वाली बात यह है कि मुख्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों की कमी के बावजूद दिहाड़ी पर सेवानिवृत्त अधिकारियों की सेवाएं ली जा रही हैं। वहीं, जिन वरिष्ठ अधिकारियों को मुख्यालय में जिम्मेदारी दी जानी चाहिए, उन्हें युवा अधिकारियों के स्थान पर फील्ड में भेजा जा रहा है। तबादलों की यह तस्वीर कई सवाल खड़े कर रही है कि आखिर फील्ड में नई ऊर्जा और बेहतर कार्यशैली वाले अधिकारियों की जरूरत को प्राथमिकता क्यों नहीं दी गई?

तबादला आदेश प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन मनेंद्रगढ़ जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में स्पष्ट कार्यशैली वाले अधिकारी का इतने कम समय में स्थानांतरण होना अपने आप में चर्चा का विषय जरूर बन गया है।

Popatlal News

Sanjay Choubey Chief Editor

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