सर्वर डाउन के चलते चौबेबांधा में चावल लेने बैठे रहे हितग्राही

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”संतोष सोनकर की रिपोर्ट”

राजिम। इन दिनों सर्वर डाउन होने की चर्चा आम हो गई है पहले यह शब्द बैंकों तक सीमित थी लेकिन अब इंटरनेट के युग में छोटे से लेकर बड़े तक इनका मतलब समझने लगे हैं। सर्वर डाउन का सीधा अर्थ काम में रुकावट है। कंप्यूटर की भाषा में सर्वर हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर का एक संयोग है जिसे क्लाइंट की सेवा के लिए डिजाइन किया गया है जिसे केवल सर्वर कहते हैं तब इसका अर्थ एक ऐसा कंप्यूटर है जो किसी सर्वर ऑपरेटिंग सिस्टम को चालू रखता है। जब सर्वर खुद से जुड़े अन्य डिवाइसों को सर्विस देना बंद कर देता है या फिर सरवर काम करना बंद कर देता है तो उसे सर्वर डाउन कहते हैं अन्य शब्दों में इसे सर्वर क्रैश भी कहा जाता है। जी हां हम बात कर रहे हैं चौबेबांधा ग्राम पंचायत की। दिन शनिवार को शासकीय उचित मूल्य की दुकान से खाद्यान्न योजना से चावल वितरण होना था लोग सुबह से ही लाइन लगाए थे इनके पहले वह अपने कार्ड को जमा कर दिए और 10:00 बजे से अपनी बारी के इंतजार करने में बैठे रहे। दुकान संचालक जैसे ही आए। 1:00 बजे तक रुक-रुक कर आ रही सरवर के साथ कुछ लोगों को चावल दिया उनके बाद तो पूरी तरह से बंद ही हो गया फिर लोग बैठे-बैठे इंतजार करते रहे। यह क्रम चार बजे तक चला और अचानक 4:00 बजे के बाद सरवर आ गया। उसके बाद तो मुझे पहले तो मुझे पहले दो कहने लगे। शांत कराने के बाद क्रमश: देने का काम चालू हुआ। हितग्राहियों के मांग के अनुसार दुकान संचालक ने शाम 7:00 बजे तक जितनी चावल उनके पास थी वितरण करते रहे उसके बाद चावल खत्म होने के बात कहकर दुकान बंद कर दिया। बताया गया कि यहां कुल 400 के लगभग कार्ड है जिन्हें खाद्यान्न वितरण होता है। शाम तक 300 के लगभग हितग्राहियों को चावल मिल चुका था। बाकी को शायद अगले दिन मिलेगा। सरवर के चक्कर में लोगों के काम लगातार बिगड़ रहे हैं। इससे मुक्ति के लिए अन्य कोई साधन ढूंढना जरूरी है वरना लोगों को अपना काम छोड़कर सरवर के ही चक्कर में भूखे प्यासे रहना पड़ेगा। वर्तमान में यही स्थिति न सिर्फ चौबेबंधा ग्राम पंचायत की है। बल्कि हर जगह यही नौबत हर समय आ रही है जिससे आम जनता के अलावा सभी वर्ग के लोग परेशान हैं।

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