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फर्जी दस्तावेज से सरकारी नौकरी, मोहन सिंह काजले को सजा

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खरगोन जिले में फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने के मामले में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। मामले में हॉस्टल अधीक्षक मोहन सिंह काजले को दोषी करार देते हुए 3 वर्ष के कारावास और 27 हजार रुपये के जुर्माने की सजा दी गई है, जबकि सहआरोपी उनकी सास भगवती बाई को भी दोषी मानते हुए 6 माह की जेल और 2 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जांच में सामने आया कि आरोपी ने स्नातक की फर्जी अंकसूची तैयार कर लगभग 10 वर्षों तक विभिन्न पदों पर सरकारी सेवा की और बाद में खालवा क्षेत्र में आदिम जाति कल्याण विभाग के अंतर्गत हॉस्टल अधीक्षक के रूप में पदस्थ रहा। छैगांव माखन में पदस्थापना के दौरान शिकायत मिलने पर विभागीय जांच में आरोप सही पाए गए, जिसके बाद उसे निलंबित कर दिया गया था। यह मामला 2020 में दर्ज हुआ था और लगभग पांच वर्षों तक चली सुनवाई के बाद न्यायालय ने 25 अप्रैल 2026 को फैसला सुनाया। फैसले के बाद आरोपी द्वारा कोर्ट परिसर में भागने की कोशिश का मामला भी सामने आया, जिससे माहौल कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गया।

Popatlal News

Sanjay Choubey Chief Editor

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