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“क्रीड़ा से चरित्र और चरित्र से राष्ट्र निर्माण” के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही ‘क्रीड़ा भारती

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रायपुर। “क्रीड़ा से चरित्र निर्माण और चरित्र से राष्ट्र निर्माण” के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही ‘क्रीड़ा भारती’ खेलों के माध्यम से समाज में अनुशासन, उत्तम स्वास्थ्य और राष्ट्रभक्ति की भावना जागृत करने के उद्देश्य से समर्पित संस्था ‘क्रीड़ा भारती’ ने आज एक प्रेसवार्ता को सम्बोधित किया। इस दौरान संस्था के पदाधिकारियों क्रीड़ा भारती के प्रान्त मंत्री सुमीत उपाध्याय, नीता डुम्बहरे और संजय शर्मा ने संयुक्त रूप से क्रीड़ा भारती के गौरवशाली इतिहास और इसके दूरदर्शी उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि क्रीड़ा भारती की स्थापना वर्ष 1992 में महाराष्ट्र के पुणे में हुई थी। तब से लेकर आज तक यह संस्था अपने मूल मंत्र “क्रीड़ा से निर्माण चरित्र का, चरित्र से निर्माण राष्ट्र का” को चरितार्थ करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। संस्था का मानना है कि एक स्वस्थ और अनुशासित खिलाड़ी ही एक सशक्त राष्ट्र का आधार बन सकता है।
इस संस्था का मुख्य उद्देश्य खेल संस्कृति का पुनरुद्धार: समाज में खेलों के प्रति सकारात्मक वातावरण बनाना और खेल संस्कृति को जन-जन तक पहुँचाना।
स्वदेशी खेलों को प्रोत्साहन: आधुनिक खेलों के साथ-साथ भारत के पारंपरिक और ग्रामीण खेलों को बढ़ावा देना ताकि हमारी विरासत सुरक्षित रहे।
सर्वांगीण स्वास्थ्य और योग: देश के प्रत्येक नागरिक को स्वस्थ रखने हेतु योग का व्यापक प्रचार-प्रसार करना।
चरित्र एवं राष्ट्र निर्माण: युवाओं में खेलों के माध्यम से अनुशासन, धैर्य और अटूट राष्ट्रभक्ति की भावना विकसित करना।
प्रतिभा खोज: स्थानीय स्तर पर खेल प्रतिभाओं को पहचानना और उन्हें उचित मंच प्रदान करना।
क्रीड़ा भारती का लक्ष्य केवल खिलाड़ी तैयार करना नहीं, बल्कि ऐसे नागरिक तैयार करना है जो शारीरिक और मानसिक रूप से सुदृढ़ हों और राष्ट्र सेवा की लिए सदैव तत्पर रहें।

Popatlal News

Sanjay Choubey Chief Editor

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