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प्रवासी पक्षी पर्यावरण संतुलन के लिए महत्वपूर्ण

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खैरागढ़। हर साल मई और अक्टूबर के दूसरे शनिवार को “विश्व प्रवासी पक्षी दिवस” मनाया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 2006 में प्रवासी पक्षियों और उनके प्राकृतिक आवासों को बचाने के उद्देश्य से की गई थी। इस दिवस का मकसद लोगों को यह समझाना है कि हजारों किलोमीटर की यात्रा करने वाले ये पक्षी पर्यावरण संतुलन के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। राज्य में हर साल सर्दियों के मौसम में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं। इनमें से कई पक्षी साइबेरिया, रूस, मंगोलिया, यूरोप, मध्य एशिया और हिमालयी क्षेत्रों से लंबी उड़ान भरकर यहां आते हैं। अक्टूबर से मार्च के बीच प्रदेश के जलाशयों, वेटलैंड्स, नदियों और जंगलों में इनकी मौजूदगी बढ़ जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार राज्य “सेंट्रल एशियन फ्लाईवे” का हिस्सा है, जिसके कारण विदेशी पक्षियों का यहां नियमित आगमन होता है।
राज्य में कॉमन क्रेन, ब्राह्मणी बतख, नॉर्दर्न शोवलर, यूरेशियन कर्ल्यू, व्हिम्ब्रेल, साइबेरियन रूबीथ्रोट, ग्रेटर फ्लेमिंगो, ग्रेट व्हाइट पेलिकन, स्पॉटेड रेडशैंक, गैडवाल, रफ और ब्लूथ्रोट जैसे प्रवासी पक्षी देखे जाते हैं। ये पक्षी भोजन, सुरक्षित जलाशय और अनुकूल मौसम की तलाश में यहाँ पहुंचते हैं। खासतौर पर खैरागढ़, डोंगरगढ़, बिलासपुर, रायपुर, महानदी तट, शिवनाथ नदी क्षेत्र, बेलौदी डैम और विभिन्न बांध क्षेत्रों में इन पक्षियों की मौजूदगी दर्ज की जाती है। खैरागढ़ और डोंगरगढ़ क्षेत्र के तालाब व जलाशय भी अब प्रवासी पक्षियों के महत्वपूर्ण ठिकानों में गिने जाने लगे हैं। यहां हर साल दूर देशों से आने वाले जलपक्षी कई महीनों तक डेरा डालते हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ता प्रदूषण, जलाशयों का खत्म होना और अवैध शिकार प्रवासी पक्षियों के लिए खतरा बन रहे हैं। ऐसे में विश्व प्रवासी पक्षी दिवस लोगों को प्रकृति और पक्षियों के संरक्षण का संदेश देने का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है।

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