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अनुकंपा नियुक्ति पर संवेदनशीलता जरूरी: हाईकोर्ट

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हाईकोर्ट की एकलपीठ ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बैंक के रवैये पर कड़ी टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया कि किसी कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके आश्रित द्वारा समय पर आवेदन देने के बावजूद केवल “रिक्त पद उपलब्ध नहीं है” का आधार लेकर नियुक्ति से इनकार करना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता। यह फैसला “संतोष सिन्हा बनाम छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक” मामले में न्यायमूर्ति एके प्रसाद की एकलपीठ ने सुनाया। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अनादि शर्मा ने अदालत में तर्क दिया कि उनके पिता बैंक में कार्यरत थे और उनकी मृत्यु के बाद परिवार गंभीर आर्थिक संकट में आ गया था, लेकिन समय पर आवेदन देने के बावजूद बैंक ने वर्षों तक मामला लंबित रखा और अंत में रिक्त पद न होने का हवाला देकर नियुक्ति से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि समान परिस्थितियों वाले अन्य मामलों में नियुक्ति दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि मृत्यु के समय ही पद रिक्त हो जाता है और अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य ही परिवार को तत्काल राहत देना है, इसलिए बैंक का तर्क स्वीकार योग्य नहीं है। अदालत ने बैंक का आदेश निरस्त करते हुए याचिकाकर्ता को 90 दिनों के भीतर चतुर्थ श्रेणी पद पर नियुक्ति देने के निर्देश दिए।

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