Saturday, November 7, 2026
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“मैं से हम” की सोच ही राष्ट्र निर्माण की नींव: मुकुल कानिटकर

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के पंचम सरसंघचालक स्व. कुप्पाहली सीतारमैया सुदर्शन की जयंती के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय व्याख्यान में मुख्य वक्ता मुकुल कानिटकर ने कहा कि हिंदू समाज का आधार “मैं से हम की ओर” जाने की यात्रा है, जिसमें स्वदेशी का चिंतन, कुटुंब व्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए संवाद, सामाजिक समरसता, पर्यावरण के प्रति संवेदना और राष्ट्रीय कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्धता जैसे पांच प्रमुख परिवर्तन शामिल हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता संघचालक डॉ. टोपलाल वर्मा ने की, जबकि मुख्य अतिथि अनुराग पांडे रहे और संचालन साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा ने किया, वहीं कार्यक्रम संयोजिका शील शर्मा ने स्वागत भाषण दिया। मुख्य वक्ता मुकुल कानिटकर ने अपने संबोधन में कहा कि देश का निर्माण हर व्यक्ति के सामूहिक योगदान से होता है, जैसे शरीर की सभी कोशिकाएं मिलकर अंगों का निर्माण करती हैं और उनका संतुलित कार्य जीवन को चलाता है, उसी प्रकार प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह अपने दायित्वों का निर्वहन करे ताकि राष्ट्र सशक्त बन सके। उन्होंने यह भी कहा कि स्वार्थी प्रवृत्ति समाज और देश को कमजोर करती है और भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं को बढ़ावा देती है, इसलिए ऐसे तत्वों को समाज द्वारा स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। अपने संबोधन में उन्होंने संघ को लेकर कहा कि यह हिंदू समाज को संगठित करने की एक यात्रा है और इसका उद्देश्य व्यक्ति निर्माण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण करना है।

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Sanjay Choubey Chief Editor