ठीक से बारिश नहीं होने से किसानी पिछड़ी

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“संतोष सोनकर की रिपोर्ट”

राजिम। जून लगते ही बारिश शुरू हो जाता है परंतु इस बार सक्रिय होने की बात तो दूर मात्र खंड खंड वर्षा हो रही है कहीं पर ज्यादा पानी गिर रहे हैं तो कहीं पर बूंदाबांदी होकर बंद हो जाते हैं लोग अच्छी बारिश के इंतजार में बैठे हुए हैं किसानों को अब चिंता सताने लगी है क्योंकि सुबह से ही सूर्य देव अपने तेज किरने फैला देता है। बादल बदली से ढका नहीं रहता है बल्कि खुला होने से सीधे तेज धूप पड़ती है चिपचिपी गर्मी, बिजली कटौती, सुखा खेत अनेक समस्याएं इन दिनों देखने को मिल रही है। पिछले साल इन दिनों करीब 90% बोनी का काम पूर्ण हो गया था जबकि इस बार मात्र 40% ही बोनी हुए हैं किसान महेंद्र पटेल, जीवन साहू, लीला राम साहू, लोकेश साहू, गोकुल साहू, दीनदयाल पटेल, संतोष सोनकर, ओम प्रकाश साहू, लखन लाल साहू, देवनारायण ने बताया कि बारिश का बेसब्री से इंतजार है ठीक से पानी नहीं गिरने के कारण हमें चिंता हो रही है। रुक-रुक कर हुए बारिश से खेत गीली हो गई है जोताई का काम चल रहा है और इन्हीं के साथ ही धान का छिड़काव भी कर रहे हैं। यदि पानी नहीं गिरा और इसी तरह से धूप निकलता रहा तो बीज खराब हो जाएगा। इस समय बीज की कीमत महंगाई के चरम को प्राप्त कर लिया है। किसानों को धान के बीजहा के लिए अच्छी खासी रुपए देने पड़ रहे हैं। किसान मोहनलाल, शिवदयाल वर्मा, दीनानाथ निषाद, भेख लाल ने बताया कि खाद की रेट बढ़ी हुई है। खेती करना बहुत मुश्किल हो गया है सभी सामानों के अलावा मजदूरी, ट्रैक्टर, दवाई, खाद इत्यादि खरीदने में पसीने छूट जाते हैं कमाई की अधिकांश पूंजी इसी में लग जाता है क्या करें खेती जो करना है। बिना कृषि कार्य से जिएंगे कैसे? यदि खाद बीज दवाई की कीमत कम हो जाते तो कृषि पर अच्छी मुनाफा हो सकती है लेकिन उपज बेचने के बाद उधारी चुकता करने के साथ ही लगभग जीवन बस चल रहे हैं। कुछ बनाने या कुछ करने की सोच भी नहीं सकते। इन किसानों का कहना है कि खेती करना वर्तमान समय में जोखिम हो गया है और मौसम की मार भी कुछ कम नहीं है। अब तो किसान प्रतिदिन बादल की ओर टकटकी लगाए देख रहे हैं एक और अपने इष्ट देवता से मंदिरों में जाकर प्रार्थना कर रहे हैं तो दूसरी ओर खेतों में किसान बोवाई इस उम्मीद से कर रहे हैं की शीघ्र वर्षा होगी। कुछ लोगों का मानना है कि रथ यात्रा के साथ ही खूब बरसा होगी। बता दे कि पिछले साल की तुलना में इस बार अंचल में कम बारिश हुई है जिससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीर छा गई है।ट्रैक्टर से जुताई की किराया बढ़ाअब बैलों से हल चलाकर जुताई करने का रिवाज लगभग खत्म होने को है कहीं-कहीं पर ही या दृश्य देखने को मिलता है अधिकांशतः ट्रैक्टर से ही जुताई का कार्य करते हैं तेल की कीमत बढ़ने से किराया लगातार बढ़ी है पिछले साल 800 से लेकर 900 तक प्रति घंटा जोताई का किराया लिया जाता था परंतु इस बार 1000 से लेकर 12 सौ तक किराया प्रति घंटा है।बिजली कटौती से हाल बेहालखेतों पर सप्लाई देने वाली बिजली बार-बार कटौती की जाती है जिससे मोटर पंप से पलाने का काम नहीं हो पाता। बता देना जरूरी है कि धान थरहा लगाने के लिए मोटर पंप से पानी की जरूरत हो रही है लेकिन यहां बार-बार कटौती ने मुश्किलें बढ़ा दी है बताया गया कि अंचल के गांव में पिछले 2 दिनों से बिजली बंद थी जो आज दिन सोमवार को सप्लाई शुरू शुरू हुई है।दुकानों पर बिकने वाले बिजहा धान के होनी चाहिए जांचशहर के खाद दवाई दुकानों पर पैकेट बंद धान बीजहा ऊंची कीमत पर बेची जा रही है कई बार किसानों को नुकसान हो जाता है पिछले साल चौबेबांधा के एक किसान दुकान से बीज ले गए थे वह थरहा के लिए धान बोया और बराबर पानी पलाने का भी काम किया परंतु ठीक से नहीं जगने के कारण उन्हें नुकसान उठाना पड़ा। आनन-फानन में ऊंची कीमत पर थरहा खरीदा तब कहीं जाकर खेतों को पैक किया। इसकी शिकायत के लिए पैकेट में दी गई नंबर से संपर्क का करना चाहा परंतु मोबाइल ही बंद था फोन ही नहीं गया, तब जाकर दुकान संचालक से शिकायत किया उन्होंने कहा कि आपकी बात पहुंचा दिया गया है कंपनी दूसरी पैकेट देंगे लेकिन उन्हें दूसरी धान के पैकेट भी नहीं मिला। इस तरह से किसानों के साथ धोखा किया जा रहा है। बीज कंपनी के धान की बराबर जांच होनी चाहिए ताकि किसानों को सही बिजहा धान प्राप्त हो।

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