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मण्डीप खोल गुफा: आस्था, रोमांच और प्रकृति के संरक्षण का संगम

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खैरागढ़-छुईखदान-गंडई। क्षेत्र के ठाकुरटोला जमीदारी में स्थित मण्डीप खोल गुफा एक बार फिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनने जा रही है, जो साल में केवल एक बार 27 अप्रैल को ही खोली जाती है और इस दिन हजारों नहीं बल्कि लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा, स्वास्थ्य, यातायात और मूलभूत सुविधाओं की तैयारियां तेज कर दी हैं। यह गुफा धार्मिक आस्था के साथ-साथ रहस्य और परंपरा का अनोखा संगम मानी जाती है, जहां मान्यता है कि अक्षय तृतीया के बाद आने वाले पहले सोमवार को भगवान शिव के दुर्लभ दर्शन होते हैं और सबसे पहले ठाकुरटोला राजपरिवार द्वारा पूजा-अर्चना के बाद आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन शुरू होते हैं। घने जंगलों, पहाड़ियों, कठिन रास्तों और नदी पार करने की चुनौती के बीच स्थित यह गुफा प्राकृतिक शिवलिंग, पवित्र कुंड और ‘श्वेत गंगा’ नामक जलधारा के लिए भी प्रसिद्ध है, जो इसे एक महत्वपूर्ण जल स्रोत और विशेष धार्मिक स्थल बनाती है। वहीं दूसरी ओर वैज्ञानिकों ने इस गुफा के संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्र को लेकर चिंता जताई है, जहां अत्यधिक भीड़, शोर और प्रदूषण से वहां की जैव विविधता और नाजुक इकोसिस्टम को नुकसान पहुंच सकता है, इसलिए विशेषज्ञ गुफाओं के संरक्षण और नियंत्रित दर्शन व्यवस्था पर जोर दे रहे हैं। कुल मिलाकर मण्डीप खोल गुफा आस्था, रोमांच और विज्ञान का अनोखा संगम बन चुकी है, जहां 27 अप्रैल को श्रद्धा का सैलाब उमड़ेगा।

Popatlal News

Sanjay Choubey Chief Editor