The Popatlal

सच्ची खबर देंगे पोपटलाल

Chhattisgarh

अच्छे शब्दों की उच्चारण से जीवन को मिलती है ऊंचाई – संतोष सोनकर

Spread the love
“संतोष सोनकर की रिपोर्ट”

राजिम। राजिम माघी पुन्नी मेला के सांस्कृतिक मंच क्रमांक 2 पर फाग गीतों की रंग उड़ रही थी। यह ऐसा पक्का रंग था, जो कोई भी सुने रंगते गये। हम बात कर रहें है बेमेतरा के रामेश्वर देवांगन के फाग गीतों की। उन्होंने पारंपरिक लोकगीतों के धुन पर नगाड़े की थाप में गीतों की बौछार कर दी। गरियाबंद के प्रेम यादव के आदिवासी नृत्य में 16 से 20 साल की बालिकाओं ने काम्बीनेशन बनाते हुए एक चाल पर एक साथ मिलाकर नृत्य का आगाज किया, तो लोग देखते ही रह गये और इस तरह से राजिम मेला में आदिवासी संस्कृति मंच पर उतर आयी। खट्टी पांडुका के पुनाबाई बंसोड़ ने पंडवानी की प्रस्तुति देकर भावविभोर कर दिया। सुरसाबांधा के रूपेन्द्र साहू ने जस झांकी की शानदार प्रस्तुति दी। चैबेबांधा के लक्ष्मीनारायण मानस मंडली के दीपक श्रीवास ने धार्मिक भजन प्रस्तुत कर श्रोताओं का ताली बजाने के लिए मजबूर कर दिया। व्याख्याकार संतोष कुमार सोनकर ने सुंदरकांड प्रसंग पर कहा कि रामायण जीवन जीने की कला सीखाती है। उन्होंने तुलसी पौधे के महत्व को प्रतिपादित करते हुए कहा कि इसमें ब्रम्हा, विष्णु एवं महेष का वास होता है, इनके रहने से सकारात्मक ऊर्जा फैलती है जब तक पौधा हरा-भरा रहता है। अच्छे विचार का परिवार के सदस्यों में समावेश होता है। उन्होंने आगे कहा कि संगति अच्छे लोगों से होने चाहिए। जैसे माहौल देंगे वैसे हमारे आने वाली पीढ़ी पल्लवित होगा इसलिए छोटे बच्चों के सामने कभी भी गलत वाचन न करें। अच्छे शब्दों के उच्चारण जीवन का ऊचाईयां प्रदान करती है। कार्यक्रम देने वाले सभी सदस्यों को मंच से ही सम्मानित किया गया। मौके पर अंचल के प्रसिद्ध रामायणी रेखराम साहू सहित अनेक लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन मनोज सेन एवं दुर्गेश तिवारी ने किया। कार्यक्रम के संयोजक पुरूषोत्तम चंद्राकर ने बताया कि 19 फरवरी दिन शनिवार को रामायण सावन ध्रुव झितरी डुमर छुरा, सतनाम मंगल भजन चंद्रिका बंजारे पितईबंद, आदिवासी नृत्य गिरवर धु्रव कोसमबुड़ा, पंडवानी गंगाबाई मानिकपुरी शुक्लाभाठा, सुआ नृत्य पुनाबाई ध्रुव चंपारण की प्रस्तुति होगी। कार्यक्रम सुबह 11 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक चलेगा।

Popatlal News

Sanjay Choubey Chief Editor