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छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस पर रैली और संगोष्ठी, सरकार कर रही छत्तीसगढ़ी की उपेक्षा

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रायपुर। छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस पर शुक्रवार को चिन्हारी छत्तीसगढ़ी मंच की ओर से जागरण रैली और संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत कलेक्ट्रेट चौक स्थित छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा पर माल्यार्पण और राजगीत क साथ हुई।
इसके बाद छत्तीसगढ़ीभाषियों का बड़ा जुराव कलेक्ट्रेट गार्डन में हुआ। यहाँ मंच के संरक्षक नंदकिसोर सुकुल, जागेश्वर प्रसाद, अशोक तिवारी सहित कई लोगों ने अपनी बातें रखी। लोक गायिका रमादत्त जोशी और रेखा जलक्षत्री ने कलाकारों के साथ छत्तीसगढ़ी समाज को जगाने आवाहन गीत की प्रस्तुति भी दी। वहीं साहित्यकारों, पत्रकारों, समाज के पदाधिकारियों, कलाकारों, छात्रों ने रैली निकालकर जागरण भी किया. डॉ. भीम राव अंबडेकर की मूर्ति पर जाकर पढ़बो-लिखबो-बोलबो छत्तीसगढ़ी के नारे भी लगाए।
इस मौके पर नंदकिसोर सुकुल सहित अन्य लोगों ने कहा कि राज्य गठन के 25 वर्ष और राजभाषा बनने के 18 साल बाद भी छत्तीसगढ़ी न तो शिक्षा का माध्यम भाषा बन पाई और न ही सरकारी कामकाज की भाषा। यह सब छत्तीसगढ़ी समाज की उदासीनता और सरकारी उपेक्षा के चलते हो रही है। यही वजह है कि समाज को जगाने हमारा जागरण का काम भी चल रहा और सरकार से मांग भी सतत जारी है। आने वाले दिनों में बड़े स्तर पर आयोजन की तैयारियां चल रही है।

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