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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश,वृंदावन कॉलोनी भूमि विवाद का जगदलपुर विशेष लोक अदालत में होगा निपटारा

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जगदलपुर। शहर के वृंदावन कॉलोनी का बहुचर्चित भूमि विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। लगभग 60 एकड़ में फैली इस कॉलोनी पर मालिकाना हक को लेकर बस्तर राज परिवार और यहां निवासरत सैकड़ों परिवारों के बीच बीते कई दशकों से कानूनी संघर्ष जारी है। अब इस मामले में देश की सर्वोच्च अदालत के हस्तक्षेप के बाद समाधान की नई आस जगी है।
मिली जानकारी के अनुसार, वृंदावन कॉलोनी में 1980 के दशक से व्यवस्थित रूप से बसावट और पक्के मकानों का निर्माण शुरू हुआ था। रहवासियों का दावा है कि उन्होंने करीब 50 वर्ष पूर्व बस्तर राज परिवार से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेकर विधिवत जमीन खरीदी थी। इसी आधार पर लोगों ने यहां अपने आशियाने बनाए और धीरे-धीरे पूरी कॉलोनी विकसित होती चली गई। हालांकि, समय बीतने के साथ इस जमीन के वास्तविक मालिकाना हक को लेकर विवाद खड़ा हो गया। मामला निचली अदालत तक पहुंचा, जहां शुरुआती सुनवाई में फैसला कॉलोनी वासियों के पक्ष में आया था। इससे रहवासियों को राहत मिली और वे लंबे समय तक अपने अधिकार को लेकर आश्वस्त रहे।
बाद में इस निर्णय को चुनौती देते हुए मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान कथित रूप से रहवासियों या उनके पक्षकारों की अनुपस्थिति के कारण अदालत ने एकपक्षीय (एक्स-पार्टी) निर्णय बस्तर राज परिवार के पक्ष में सुना दिया। इस फैसले के बाद विवाद ने और गंभीर रूप ले लिया, क्योंकि हाई कोर्ट की डिक्री के बाद राज परिवार का दावा कानूनी रूप से मजबूत माना जाने लगा। हाई कोर्ट के आदेश से चिंतित रहवासियों ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
सर्वोच्च अदालत ने मामले की संवेदनशीलता, जटिलता और सैकड़ों परिवारों के आवासीय हितों को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इतने बड़े सामाजिक और आवासीय विवाद का समाधान केवल कानूनी लड़ाई से नहीं, बल्कि आपसी सहमति और संवाद से बेहतर तरीके से किया जा सकता है। इसी के तहत सुप्रीम कोर्ट ने मामले को विशेष लोक अदालत के माध्यम से निपटाने के लिए पुन: जगदलपुर जिला एवं सत्र न्यायालय भेज दिया है। कोर्ट के निर्देशानुसार अब इस विवाद के समाधान के लिए 21, 22 और 23 अगस्त 2026 की तारीखें तय की गई हैं। इन तीन दिनों के दौरान दोनों पक्षों के बीच समझौते और अंतिम समाधान की प्रक्रिया चलेगी।
प्रक्रिया के तहत जिला न्यायालय द्वारा वृंदावन कॉलोनी के लगभग 500 रहवासियों को नोटिस जारी कर अदालत में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। इससे कॉलोनी में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। बड़ी संख्या में रहवासी इस प्रक्रिया को अपने भविष्य और संपत्ति अधिकार से जुड़ा अहम मोड़ मान रहे हैं। राज परिवार का पक्ष लगातार यह रहा है कि संबंधित 60 एकड़ भूमि उनकी निजी संपत्ति है और इस पर उनका वैधानिक मालिकाना हक है। हाईकोर्ट से पक्ष में फैसला आने के बाद राज परिवार की स्थिति और मजबूत हुई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट द्वारा विशेष लोक अदालत के माध्यम से समाधान का रास्ता सुझाए जाने के बाद अब राज परिवार को भी न्यायालय के निर्देशानुसार बातचीत और सहमति की प्रक्रिया में शामिल होना होगा।
सूत्रों के मुताबिक, समाधान के तौर पर भूमि नियमितीकरण, मुआवजा, लीज अथवा अन्य वैकल्पिक फॉर्मूले पर चर्चा हो सकती है, ताकि दशकों से बसे परिवारों का भविष्य सुरक्षित रहे और राज परिवार के वैधानिक अधिकारों का भी सम्मान हो। करीब 46 साल पुराने इस विवाद पर अब पूरे शहर की नजरें टिकी हैं। अगस्त में होने वाली विशेष लोक अदालत को इस लंबे भूमि विवाद के समाधान की दिशा में निर्णायक माना जा रहा है। यदि दोनों पक्ष सहमति तक पहुंचते हैं, तो यह न केवल सैकड़ों परिवारों को राहत देगा बल्कि शहर के सबसे पुराने भूमि विवादों में से एक का पटाक्षेप भी संभव हो सकेगा।

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