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भारत के ब्रह्मोस मिसाइल पर वियतनाम और इंडोनेशिया ने जताया भरोसा

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सैन्य जरूरतों के लिए कभी विदेश पर निर्भरता दिखाने वाला भारत पर आज के समय में कई लोग इसपर अपनी निर्भरता दिखा रहे है। आज का भारत अब दूसरे देशों को अत्याधुनिक रक्षा उपकरणों का निर्यात कर रहा है। भारत का घातक ‘ब्रह्मोस मिसाइल’ अब वियतनाम और इंडोनेशिया तक पहुंचने वाला है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने यह बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि वियतनाम के साथ डील साइन कर ली गयी गई है। बस ऐलान कि औपचारिकता बची हुई है और इंडोनेशिया के साथ भी लगभग बात बन चुकी है।
भारत के डिफेंस सेक्रेटरी आरके सिंह ने देश के डिफेंस सेक्टर के लिए गेमचेंजर साबित होनेवाली बातों से अवगत कराया। जिससे दुनिया में भारत की ताकत और साख दोनों बढ़ रही है। दुनिया के पटल पर अब भारत अत्याधुनिक रक्षा उपकरणों का निर्यात करनेवाला बन गया है। इंडिया वियतनाम को घातक ‘ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल’ सिस्टम बेचने के समझौते पर हस्ताक्षर कर दिया है। कई देश भारत के स्वदेशी रक्षा उपकरण खरीदना चाह रहे हैं। भारत अब ग्लोबल निर्यातक रक्षा क्षेत्र में बनकर उभर रहा है। वियतनाम के साथ 60 अरब रुपये का यह रक्षा सौदा दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत का सामरिक दबदबा बढ़ाएगा. इंडोनेशिया के साथ भी ऐसी डील अंतिम चरण में है. याद दिला दे कि फिलीपींस भारत से ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम खरीदने वाला पहला विदेशी खरीदार था।
ब्रह्मोस एक बहुत ताकतवर मिसाइल है जो दुश्मन के जहाज, बंकर या ठिकाने को बहुत तेज रफ्तार से जाकर तबाह कर सकती है। रक्षा सचिव ने बताया कि भारत इन मित्र राष्ट्रों के साथ अपनी सबसे आधुनिक रक्षा तकनीक साझा करने में पूरी तरह सहज है। वियतनाम को भारत अपना अहम साझेदार मानता है। मार्च 2026 में इंडोनेशिया भी इसके लिए अपनी सहमति जता चुका है।

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