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हाईकोर्ट, महिला का मातृत्व अधिकार सुरक्षित, गर्भपात के बाद भी मिलेगा अवकाश

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बिलासपुर में हाईकोर्ट ने कामकाजी महिलाओं के मातृत्व अधिकारों को लेकर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी महिला कर्मचारी का गर्भपात हो जाता है और बाद में वह दोबारा गर्भवती होती है, तो पिछला मातृत्व अवकाश उसके नए मातृत्व अवकाश के अधिकार में बाधा नहीं बनेगा। महिला कर्मचारी को कानून के तहत पूरी मातृत्व छुट्टी पाने का अधिकार है। मामले की सुनवाई जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच ने की और महिला के वेतन से काटे गए 80,254 रुपये की रिकवरी को भी रद्द कर दिया। मामला भारतीय खाद्य निगम (FCI) में असिस्टेंट ग्रेड-2 पद पर कार्यरत महिला कर्मचारी से जुड़ा है, जो वर्ष 2019 में गर्भवती थीं। गर्भावस्था के दौरान जटिलताओं के चलते उनका एक भ्रूण मिसकैरेज हो गया था, लेकिन बाद में उन्होंने एक प्री-मैच्योर बेटी को जन्म दिया। विभाग ने केवल 68 दिनों का बिना वेतन असाधारण अवकाश मंजूर किया और लीव बैलेंस न होने का हवाला देकर वेतन से राशि काट ली थी। महिला ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें 90 दिनों के मातृत्व अवकाश का हकदार माना और मेडिकल बिलों के भुगतान पर पुनः जांच के निर्देश दिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि मातृत्व अवकाश एक वैधानिक और संवैधानिक अधिकार है, जो महिला के सम्मान, स्वास्थ्य और कल्याण से जुड़ा है।

Popatlal News

Sanjay Choubey Chief Editor

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