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भूविस्थापितो ने कुसमुंडा खदान परिक्षेत्र में गाड़ा झंडा,गेवरा व दीपका के बाद खुली खदान कुसमुंडा में भी आंदोलन का आगाज

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“बी एन यादव की रिपोर्ट”

कोरबा। ऊर्जाधानी भु- विस्थापित किसान कल्याण समिति ने एसईसीएल कुसमुंडा क्षेत्र द्वारा क्षेत्र की समस्याओं का निराकरण नहीं करने से अपने आंदोलन का विस्तार करते हुए कुसमुंडा खदान के किनारे बसे ग्राम खोडरी रिसदी में विरोध स्वरूप लाल झंडा लगाया गया है । इससे पहले गेट जाम करने के घोषणा के बाद बुलाई गई बैठक में प्रबंधन ने एक सप्ताह का समय मांगा था पर कुछ भी पहल नही होने से यहाँ भी गेवरा दीपका क्षेत्र की तर्ज पर विरोध स्वरूप खदान में सीमा रेखा खींचा गया है ।

एसईसीएल कुसमुंडा के द्वारा ग्राम दुरपा मोगराभाटा का 1978 में अर्जन किया गया था । मोगरा भाटा के निवासियों को यमुनानगर में पुनर्वास दिया गया है ,लेकिन पुर्नवास स्थल में देवालय एवं शमशान घाट का विधि विधान से स्थानांतरण नहीं किया गया है । मोगरा भाटा के ग्रामीण पिछले 2 वर्षों से स्थानांतरण हेतु चक्कर लगा रहे हैं अभी वर्तमान में प्रबंधन के द्वारा देवालय के प्रांगण को खोद दिया गया है जिससे ग्रामीण आक्रोशित है । ग्राम खोडरी के किसान जिनकी जमीन खदान से लगी हुई है फसल नहीं होने से अत्यंत परेशान हैं । खदान किनारे खेत होने के कारण खेत में पानी रुक नहीं पा रहा है । खेत बंजर हो गए हैं फसल नहीं होने से उन किसानों को आर्थिक रूप से नुकसान हो रहा है । खदान के किनारे बड़ा नाला निर्माण कर देने से नाले का पानी खेतों में भर जाने से फसल नष्ट हो गए हैं । नाले के मिट्टी व पानी से भी दो दशक पहले किसानों के खेत पट गए थे उन्हें भी आज तक क्षतिपूर्ति राशि नहीं दिया गया है तबसे उन किसानों के खेतों में फसल नहीं हो पा रहा है । खदान के किनारे ग्राम रिसदी खोडरी पाली जटराज चुरैल के होने के कारण गर्मी में पेयजल एवं निस्तार की गंभीर समस्या निर्मित हो जाती है । जिन ग्रामों का अर्जन आज से 15 वर्ष पूर्व किये गए हैं उन ग्रामों मेंआज तक मुआवजा का भुगतान नहीं किया गया है । खदान के तीव्र ब्लास्टिंग से बोर एवं मकान क्षतिग्रस्त हो रहे हैं जिससे ग्रामीणों को आर्थिक नुकसान हो रहा है प्रबंधन ऐसे लोगों को क्षतिपूर्ति प्रदान नहीं कर रहा है । खदान में व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण क्षेत्रीय भुविस्थापित परिवारों से आने वाले ठेका मजदूरों को 200-250 में काम कराया जा रहा है । नियमानुसार हाई पावर कमेटी रेट के अनुसार लगभग 1000 रुपया प्रतिदिन के हिसाब से मजदूरी दिया जाना चाहिए था । वर्तमान में कंपनी के द्वारा सतर्कता जागरूकता सप्ताह मनाया जा रहा है यह केवल औपचारिक हो गया है प्रबंधन में हर विभाग में व्यापक पैमाने पर भ्रष्टाचार हो रहे हैं । जिससे जमीन देने वाले भूमि पुत्रों को नुकसान हो रहा है ।

संगठन के उपाध्यक्ष बृजेश श्रीवास ने बताया कि ऊर्जाधानी भूवीस्थापित किसान कल्याण समिति के द्वारा इन सब समस्याओं के प्रबंधन द्वारा निराकरण नहीं करने के कारण 20 अक्टूबर को गेट जाम करने का अल्टीमेटम दिया गया था । प्रबंधन के द्वारा दिनांक 18 अक्टूबर को सभी 14 बिंदुओं के मांगों पर निराकरण करने का आश्वासन एवं निवेदन करने पर कुछ दिनों के लिए गेट जाम धरना प्रदर्शन का कार्यक्रम स्थगित किया गया है । समस्याओं के निराकरण करने पर प्रबंधन द्वारा गंभीरता पूर्वक कार्य नहीं किए जाने पर यथाशीघ्र आंदोलन किया जाएगा । आज खदान किनारे झंडा लगाया गया है जिसमें ग्राम पड़निया ,सोनपुरी ,पाली, रिसदी, खोडरी, चुरैल, मोगराभाटा के ग्रामीण उपस्थित थे ।

Popatlal News

Sanjay Choubey Chief Editor

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