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विधानसभा में बालार्जुन ताम्रपत्र पर विवाद, गलत जानकारी देने वाले अधिकारियों पर होगी कार्रवाई

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छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान ज्ञान भारतम अभियान के तहत प्राचीन पांडुलिपियों और ऐतिहासिक ताम्रपत्रों के सत्यापन का मुद्दा उठा। कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह ने प्रश्नकाल में बिलासपुर जिले के मस्तूरी क्षेत्र के ऐतिहासिक स्थल मल्हार से प्राप्त बालार्जुन ताम्रपट्टिकाओं को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि ताम्रपत्र की भाषा को लेकर विभागीय जानकारी और प्रधानमंत्री द्वारा बताए गए तथ्य में अंतर है। विधायक ने कहा कि यदि अधिकारियों की ओर से गलत जानकारी दी गई है तो उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारियों द्वारा गलत तथ्यों के आधार पर मंत्री से जवाब दिलवाया गया, जिससे सदन को गुमराह किया गया। इस पर संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने सदन को आश्वस्त किया कि यदि जांच में कोई अधिकारी जिम्मेदार पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने बताया कि ज्ञान भारतम अभियान के तहत छत्तीसगढ़ से मोबाइल ऐप के माध्यम से कुल 1,24,422 पांडुलिपियां पंजीकृत की गई थीं, जिनमें से 12,040 पांडुलिपियों का सत्यापन किया जा चुका है, जबकि 1,12,382 पांडुलिपियां तकनीकी या अन्य कारणों से अस्वीकृत हुई हैं। उन्होंने बताया कि मल्हार से प्राप्त बालार्जुन ताम्रपट्टिका की खोज वर्ष 1987 में हुई थी और इसकी लिपि पेटिकाशीर्ष ब्राह्मी तथा भाषा संस्कृत है। वर्तमान में यह ऐतिहासिक अभिलेख मल्हार निवासी संजीव पाण्डेय के पास सुरक्षित है। ताम्रपट्टिका की भाषा और लिपि को लेकर उठे सवालों के बाद विधानसभा में इस मुद्दे पर चर्चा हुई और सरकार ने तथ्यों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया।

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