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राज्य की सबसे ऊँची चोटी गौरलाटा की उपेक्षा पर्यटन स्थल के रुप में नहीं किया चिन्हांकित

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रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश की सबसे ऊँची चोटी गौरलाटा को पर्यटन स्थल के रुप में चिन्हांकित नहीं किया है तथा जिला प्रशासन से प्रस्ताव प्राप्त होने पर नियमानुसार उसका परीक्षण कर नये पर्यटन स्थल के रुप में चिन्हांकित करने की कार्यवाही की जायेगी। प्रश्नकाल के दौरान श्रीमती उद्धेश्वरी पैकरा ने विधानसभा में यह मामला उठाया जिस पर पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने सदन में यह जानकारी दी।
श्रीमती उद्धेश्वरी पैकरा ने अपने लिखित प्रश्न में पर्यटन मंत्री से जानना चाहा कि 13/03/2026 में दी गई जानकारी अनुसार गौरलाटा पर्यटन स्थल के विकास हेतु प्राप्त 3.40 करोड़ के प्रस्ताव पर वर्तमान में क्या कार्यवाही की गई है तथा उक्त प्रस्ताव की वर्तमान स्थिति क्या है? पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने सदन को जानकारी दी कि गौरलाटा को पर्यटन स्थल के रूप विकसित किए जाने हेतु जिला कलेक्टर बलरामपुर-रामानुजगंज से रु. 3.40 करोड़ के विकास कार्यों का प्रस्ताव प्राप्त हुआ था। जिसका स्थल परीक्षण 20.07.2023 को विभागीय क्षेत्रीय अधिकारी के माध्यम से कराया गया। इसे वर्ष 2023-24 के अनुपूरक बजट में स्वीकृत नही होने के कारण जिला स्तर पर उपलब्ध मदों/डी.एफ.एम या अन्य विभागीय योजनाओं के अंतर्गत कार्य कराने हेतु जिला प्रशासन को लेख किया गया।
विधायक उद्धेश्वरी ने फिर पूछा कि छत्तीसगढ़ प्रदेश की सर्वाधिक ऊँची चोटी गौरलाटा (सामरी विधानसभा क्षेत्र) को राज्य के पर्यटन स्थलों की सूची में शामिल कर नवीन पर्यटन स्थल के रूप में मान्यता प्रदान की गई है? यदि हाँ, तो विवरण दें। यदि नहीं, तो इसे कब तक मान्यता प्रदान किए जाने की संभावना है? पर्यटन मंत्री ने बताया कि गौरलाटा को पर्यटन स्थल के रुप में चिन्हांकित नही किया गया है।। जिला प्रशासन से प्रस्ताव प्राप्त होने पर नियमानुसार उसका परीक्षण कर नये पर्यटन स्थल चिन्हांकित करने की कार्यवाही की जायेगी जिसका समय सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

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