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निर्माण सामग्रियों और पेट्रोलियम पदार्थों की बढती कीमत,बीएआई ने राज्य सरकार से राहत दिलाने की मांग की

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बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BAI) ने कहा कि भीषण युद्ध होने के कारण निर्माण सामग्रियों और पर्याप्त मात्रा में पेट्रोलियम आधारित उत्पादन उपलब्ध न होने के कारण कार्यों में समस्या उत्पन्न होने लगी है। पिछले 1 महीने से विश्व स्तर पर USA इसराइल व ईरान के बीच युद्ध चल रहा है। जिसके कारण छत्तीसगढ़ में निर्माण कार्य प्रभावित हो रहा है। कच्चे तेल की आपूर्ति कम होने के कारण पेट्रोलियम उत्पादों एवं अन्य निर्माण सामग्रियों की कीमतों में अभूतपूर्व असामान्य वृद्धि हुई है। इसके कारण भारी संकट उत्पन्न हो गया है। बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने इंजीनियरिंग निर्माण ठेकेदारों और रियल एस्टेट कंपनियों को नुकसान से बचाने छत्तीसगढ़ सरकार / शासन से सहयोग पैकेज दिलाने की मांग पत्र लिखकर की है।
उन्होंने बताया कि डीज़ल, लाइट डीज़ल ऑयल, बिटुमेन, इमल्शन एवं अन्य पेट्रोलियम आधारित उत्पादों की दरों में अत्याधिक व अप्रत्याशित वृद्धि हुई है, जो अनुमानित सीमाओं से परे है। वर्तमान में मूल्य वृद्धि जो हो रही है उसका कोई मापदंड नहीं है।
स्टील और सीमेंट जैसी अन्य निर्माण सामग्रियों की कीमतों में भी असामान्य वृद्धि हुई है।
ईंधन की अनियमित उपलब्धता एवं परिचालनबाधाओं के कारण मशीनरी एवं उपकरणों की कार्य क्षमता एवं उत्पादकता में कमी आई है।
डीजल की कमी होने के कारण निर्माण कार्य बाधित हो रहे हैं।
बिटुमेन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं है। रेफाइनरी से प्रतिदिन आवश्यकता अनुरूप डामर नहीं मिल पा रही है।
राज्य में सीमेंट की दरों में वृद्धि समझ से परे हैं। जबकि छत्तीसगढ़ सीमेंट उत्पादक राज्य के रूप में जाना जाता है। यहां से सीमेंट पड़ोसी राज्यों को जाता है। उन सभी राज्यों में ओपीसी सीमेंट की दरें यहाँ की दरों से कम है। पीसीसी व ओपीसी की सीमेंट के बीच यहां 70 से 80 रुपए का फर्क है। वहीँ अन्य राज्यों में यह फर्क 40 से 50 रुपए का है। उन्होंने कहा कि यदि सभी सीमेंट निर्माता कंपनियां उनकी ओर ध्यान नहीं देती है तो उनके खिलाफ अपना विरोध प्रकट करना होगा।
भविष्य में डीजल व पेट्रोल के दाम 35 से 40 रूपये प्रति लीटर बढ़ने वाले हैं। ऐसे में निर्माण सामग्री के दाम कितने बढ़ेंगे और निर्माण कार्य कैसे संभव होगा।
इन कारणों से किसी तरह का निर्माण कार्य निष्पादित कर पाना मुश्किल हो गया है। इसके चलते कार्य की गति अत्यंत धीमी और बंद होने की स्थिति में पहुँच चुकी है। सभी प्रयासों के बावजूद स्थिति ठेकेदारों के नियंत्रण से बाहर है।
अब स्थिति ठेकेदार के नियंत्रण से बाहर है एवं यह एक वास्तविक बाधा (हिंड्रेन्स) है जो कि कार्य के निष्पादन को प्रभावित कर रहा है।
अतः आपसे अनुरोध हैं कि वे उन्हें निम्न लिखित राहत प्रदान करने प्रदेश के समस्त निर्माण विभाग के अधिकारियों को आदेशित करें ।
उनकी मांग है कि उपरोक्त परिस्थितियों से प्रभावित अवधि के लिए उपयुक्त समय वृद्धि बिना क्षतिपूर्ति प्रदान किया जाए।
ईंधन, बिटुमेन (डामर), स्टील, सीमेंट, इमल्सन एवं अन्य निर्माण सामग्रियों की दर में असामान्य वृद्धि हुई है चूंकि अनुबंध में प्रावधानित देय मूल्य वृद्धि फार्मूला से सामग्रियों के मूल्य वृद्धि का भुगतान प्राप्त होता है वह पर्याप्त नही है। अनुबंध के प्रावधानों से परे अतिरिक्त क्षतिपूर्ति स्वीकृत की जाए।
परिस्थितियां अनुबंध की प्रासंगित धाराओं के अन्तर्गत राहत के लिए पात्र हैं जैसे कि फोर्स मेज्योर / विधि में परिवर्तन / मूल्य समायोजन / बाधा सम्बन्धी प्रावधान पर गंभीरता से विचार करते हुए राहत प्रदान किया जाए।
जिन अनुबन्ध में एस्केलेशन / दर वृद्धि भरपाई की शर्त नही है। उन अनुबन्ध में फोर्स मेज्योर के अन्तर्गत अतिरिक्त क्षतिपूर्ति स्वीकृत की जाए।
जिससे शीघ्र जारी करे ताकि कार्य प्रभावित न हो व ठेकेदार पूरी गति और गुणवत्ता से कार्य जारी रख सके।

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