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Chhattisgarh

लक्ष्मण झूला में चढ़ने के बाद लोगों के खुशी का ठिकाना नहीं

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“संतोष सोनकर की रिपोर्ट”

राजिम। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने महाशिवरात्रि के अवसर पर प्रदेश के सबसे बड़े लक्ष्मण झूला का लोकार्पण किया इनके साथ ही यह जनता के लिए खुल गया। लोकार्पण शाम को हुआ इसलिए कुछ ही लोग कर चढ़कर लक्ष्मण झूला को देख पाए थे लेकिन आज सुबह से ही लोगों की उत्सुकता बनी रहे और लक्ष्मण झूला में चढ़कर पहली बार झूला में चढ़ने का आभास क्या होता है वह मजा लेते रहे। उल्लेखनीय है कि सन 2017 में तत्कालीन सरकार ने लक्ष्मण झूला के लिए 35 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की थी और काम शुरू हो गया था 5 सालों में यह बनकर तैयार हुआ। 610 मीटर लंबी इस सस्पेंशन ब्रिज के डिजाइन अपने आप में नए-नए दृश्य को जन्म देती है संगम तट से लेकर कुलेश्वर नाथ महादेव मंदिर तथा लोमस ऋषि आश्रम तक चलने का अपना अलग एहसास है। अब बरसात काल में भी श्रद्धालुओं को सीधे कुलेश्वर नाथ महादेव मंदिर में जाकर दर्शन कर पाएंगे। कहना होगा कि बरसात के समय बाढ़ आने के कारण लोगों को महादेव का दर्शन नहीं हो पाते थे तथा सावन मास में कांवरिया दूर से ही प्रणाम कर वापस चले जाते थे अब ऐसी नौबत नहीं आएगी वह सीधे शिवलिंग तक पहुंचेंगे और दर्शन करेंगे। यहां पहुंचने के लिए धमतरी जिला के बेलाई घाट से सीधा पहुंचा जा सकता है तो गरियाबंद जिला के राजिम प्रयाग तट पर जाकर लक्ष्मण झूला चढ़ने का सौभाग्य प्राप्त किया जा सकता है। आज खूब भीड़ व चहल-पहल रही। दुर्गेश कुमार, सुमित्रा साहू, दीनानाथ, कीर्ति, मोनिका, दिव्या, डाली, महेश्वर ने बताया कि हमने लक्ष्मण झूला का नाम सुना था लेकिन आज राजिम आ कर देख भी लिया और चढ़ने का अवसर भी मिल गया। सचमुच में हमारे लिए यह अत्यंत खुशी का पल है। महेंद्र पटेल, योगेश सोनकर, तुलाराम, जानकी, गीता, द्वारिका, पार्वती ने बताया कि इन की डिजाइनें हमने अखबार में देखा था तथा खबर पढ़ी थी और आज साक्षात दर्शन हो गया सब महादेव की कृपा है तत्कालीन सरकार ने लक्ष्मण झूला बनाकर ना सिर्फ राजिम को बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ को सौगात दी है। वर्तमान सरकार ने इनका उद्घाटन करके जनता को समर्पित किया है पहली बार चढ़ने के बाद हमें बहुत बढ़िया लग रहा है। इससे पर्यटकों की संख्या निरंतर बढ़ेगी। जितने मुंह उतनी बात लोग लक्ष्मण झूला में चलने तथा महादेव का दर्शन करने की वर्णन करते जा रहे थे। प्रथम दिन कम से कम 70 से 80 हजार लोगों ने लक्ष्मण झूला चढ़ा। आगे भी यह क्रम जारी रहेगा अब तो यह जनता को समर्पित हो गया है।

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